उत्तर प्रदेश के नोएडा में पार्क में नमाज पढ़े जाने पर रोक लगने का मुद्दा अभी भी गर्माया हुआ है. आज शुक्रवार है इस लिहाज से नोएडा में सुरक्षा कड़ी है तो वहीं उत्तर प्रदेश कांग्रेस के नेता संपूर्णानंद ने डीजीपी को चिट्ठी लिख प्रदेश में लगने वाली राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की शाखाओं पर रोक लगाने की मांग की है. उन्होंने कहा कि अलग-अलग नियम क्यों चलाया जा रहा है.
कांग्रेस के संपूर्णानंद का कहना है कि जब खुले में नमाज पर रोक लगाई गई है, तो यही नियम RSS की शाखा पर लागू क्यों नहीं किया जा रहा है. इस प्रकार का आदेश देना पूरी तरह से अनावश्यक है. आपको बता दें कि संपूर्णानंद उत्तर प्रदेश कांग्रेस के विचार विभाग के प्रमुख हैं.
दरअसल, 25 दिसंबर के दिन ये मामला अचानक चर्चा में आया था. जब नोएडा के सेक्टर 58 में स्थानीय लोगों की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने लोगों को नमाज पढ़ने से रोक दिया था.
आज शुक्रवार की नमाज के चलते प्रशासन ने फिर वहां पर सुरक्षा बढ़ा दी थी. प्रशासन ने लोगों को एकत्रित होने से पहले ही पार्क में पानी भरवा दिया, ताकि कोई नमाज ना पढ़ सके. इतना ही नहीं इस पार्क के आसपास पुलिस भी तैनात की गई है.
गौरतलब है कि बीते 19 दिसंबर को यहां नमाज पढ़ रहे दो लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार भी किया था. पुलिस का कहना था कि ये जबरन नमाज पढ़ने की कोशिश कर रहे थे. इस मुद्दे ने राजनीतिक तूल भी पकड़ा था. समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी ने इस मुद्दे पर राज्य की भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा था. विपक्षी पार्टियों का कहना था कि लोकसभा चुनाव में फायदा उठाने के लिए इस प्रकार की साजिशें रची जा रही हैं.
एक्टर नसीरुद्दीन शाह ने इंडिया टुडे से ख़ास बातचीत में बयान पर उठे विवाद को लेकर एक बार फिर अपना पक्ष दोहराया. राजदीप सरदेसाई से बातचीत में नसीरुद्दीन ने अपने तमाम बयानों पर पर पक्ष रखा. उन्होंने साफ़ किया कि बयान के बाद जिस तरह सोशल मीडिया पर वो ट्रोल्स के निशाने पर आए हैं, इससे उन्हें रोका नहीं जा सकता. उन्होंने यह भी साफ़ किया कि वो डरे नहीं हैं, लेकिन उन्हें गुस्सा जरूर है.
एक्टर ने कहा, "मुझे अपने बयान पर खेद नहीं है. मैं ये भी नहीं कहता कि मुझे किया गया. मैं डरा नहीं हूं, लेकिन गुस्से में हूं. पहले मॉब लिंचिंग नहीं होती थी. आजकल ये चीजें हो रही हैं. मैं अपनी चिंता व्यक्त कर रहा हूं. मैं अपने बच्चों के लिए परेशान हूं. मैं बतौर मुस्लिम इंसिक्योर नहीं हूं."
बता दें कि एक्टर ने देश में धर्म और जाति के नाम पर बुलंदशहर का जिक्र करते हुए भीड़ की हिंसा पर सवाल उठाए थे. उन्होंने कहा था कि एक गाय की जान पुलिस अफसर से ज्यादा कीमती हो गई है. हमने (पत्नी रत्ना पाठक शाह) अपने बच्चों को धार्मिक तालीम नहीं दी है. मुझे डर लगता है कि अगर उनसे उनका धर्म पूछा गया तो वे क्या जवाब देंगे? समाज में बढ़ रही साम्प्रदायिकता पर अपनी बात के क्रम में ही उन्होंने ये भी कहा, समाज में इस तरह का जहर फ़ैल चुका है. मुझे मेरे बच्चों को लेकर चिंता होती है. इससे पहले एक्टर ने क्रिकेटर विराट कोहली के व्यवहार पर भी निशाना साधा था.
"आप किसी चीज के बारे में तभी बोलते हैं जब आपको उसकी चिंता होती है. समाज में नफरत और सांप्रदायिकता फैलाई जा रही है. मैं ये बातें एक मुस्लिम शख्स के रूप में नहीं बोल रहा हूं. मैं अपनी मुस्लिम पहचान का फायदा नहीं उठाता. सभी धर्मों का मैं सम्मान करता हूं. एक भारतीय होने के नाते मैंने अपना दर्द बयान किया था मुस्लिम होने के नाते नहीं. ट्रोलर्स के पास कोई काम नहीं है. वे मुझे रोक नहीं सकते."
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