Friday, March 8, 2019

5 सेकंड में नीरव मोदी का 100 करोड़ का बंगला ध्वस्त, देखें VIDEO

आख‍िरकार कई महीनों से चर्चित फरार हीरा कारोबारी नीरव मोदी का अलीबाग वाला बंगला ढहा दिया गया. शुक्रवार दोपहर में 100 करोड़ का समंदर क‍िनारे का बंगला 100 व‍िस्फोटकों की मदद से जमींदोज कर द‍िया गया. इससे पहले मंगलवार को बंगले को ढहाने का काम शुरू हुआ था. सबसे पहले बंगले के शीशों को तोड़कर मलबे में तब्दील क‍िया गया और आज 30 हजार वर्गफीट में बने बंगले को भी ढहा द‍िया गया.

नीरव मोदी का देशभर में चर्चित अलीबाग वाला बंगला महाराष्ट्र के रायगढ़ ज‍िले में स्थ‍ित है. सी-बीच के पास बने करीब 100 करोड़ रुपये के इस बंगले को तोड़ने का दूसरा चरण मंगलवार को शुरू हो गया था. अब तक उन ढांचों को गिराया गया है जिनमें शीशे लगे थे. बंगले में लगे शीशों को इसल‍िए हटाया गया क्योंक‍ि व‍िस्फोट के बाद यद‍ि शीशे उड़कर पास के बंगलों में ग‍िरे तो इससे बड़ा नुकसान हो सकता था.

नीरव मोदी करीब 13,700 करोड़ रुपए के पीएनबी घोटाले का मुख्य आरोपी है. घोटाला उजागर होने के बाद नीरव मोदी के कई ठ‍िकानों पर छापे पड़े और उसकी संपत्त‍ि सीज की गई थी. कई बेडरूम और हॉल वाले इस बंगले में फर्स्ट फ्लोर पर 1000 वर्ग फीट का स्वीमिंग पूल भी है. मोदी ने इस बंगले के बाहर अवैध तरीके से एक गार्डन भी बनवाया था.

महाराष्ट्र सरकार द्वारा नीरव मोदी के इस बंगले को गिराने का आदेश 4 दिसंबर को ही जारी कर दिया गया था. आदेश पर अमल करते हुए बंगले को तोड़ने का पहला चरण 25 जनवरी को शुरू हुआ था. तब कई दीवारें तोड़ी गई थीं लेक‍िन 27 जनवरी को काम रोक दिया गया था. नीरव मोदी को अलीबाग क्षेत्र में 376 वर्ग मीटर के प्लॉट पर बंगला बनाने की परमिशन म‍िली थी, लेकिन उसने 1081 वर्ग मीटर जगह का घेराव किया. अब सरकार द्वारा इस अवैध निर्माण को ढहाया जा रहा है.

नीरव मोदी के इस बंगले को जनवरी में गिराने का काम इसलिए रोका गया क्योंकि प्रशासन घर के भीतर से कीमती सामानों को सही से निकालना चाहता था ताकि बंगले की संपत्ति से अधिक से अधिक रकम की भरपाई की जा सके. इससे पहले नीरव मोदी की 147.72 करोड़ रुपए की संपत्ति प्रवर्तन निदेशालय ने अटैच की थी.

नीरव मोदी 13,700 करोड़ रुपए के पीएनबी घोटाले का आरोपी है. नीरव ने विशेष अदालत को जवाब भेजकर कहा था कि वह सुरक्षा कारणों से भारत नहीं आ सकता. नीरव फिलहाल ब्र‍िटेन में रह रहा है. 

काशी विद्वत परिषद के संगठन महामंत्री दीपक मालवीय का कहना है कि बाबा विश्वनाथ का देश के द्वादश ज्योतिर्लिंगों में विशेष महत्व है. वो पूरे विश्व के नाथ हैं. पूरे देश के लोग मुक्ति की प्राप्ति के लिए काशी आते हैं. तो इन्हें कौन मुक्त करेगा जो खुद लोगों को मुक्ति देते हैं, काशी मोक्ष का कारक है. बाबा विश्वनाथ के इर्द गिर्द सुंदरीकरण किया जा सकता है, सुविधाएं बढ़ाई जा सकती हैं लेकिन बाबा को मुक्त करने की बात कहना अनुचित है.

दीपक मालवीय ने कहा कि काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के निर्माण के लिए जिन मंदिरों और देव विग्रहों को तोड़ा गया उसे जमींदोज कर उसके ऊपर निर्माण करना अनुचित प्रक्रिया है. क्योंकि इन सभी देव विग्रहों की प्राण प्रतिष्ठा हुई थी. अगर सरकार सुंदरीकरण कर रही है तो इन्हें पुन: प्राण प्रतिष्ठित कराते हुए दर्शन पूजन की उचित व्यवस्था करे.

काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की जद में आने वाले क्षेत्र को बनारस में पक्का महाल कहा जाता है. यह क्षेत्र गंगा तट पर अस्सी से राजघाट तक फैला है. बनारस का यह इलाका खुद में कई संस्कृतियों को समेटे हुए है. अलग-अलग राज्यों के रियासतों की प्राचीन इमारत व वहां पूजे जाने वाले पौराणिक मंदिर और देव विग्रह इसी क्षेत्र में स्थित हैं. जिनके दर्शन करने पूरे देश से लोग आते हैं. पक्का महाल में बंगाली, नेपाली, गुजराती, दक्षिण भारतीय समुदायों के अपने अपने मोहल्ले हैं और इनसे जुड़े देवी देवताओं के मंदिर हैं.

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