ग़लत ढंग से पकाए जाने पर ये ज़हरीली हो सकती हैं लेकिन स्थानीय लोगों द्वारा प्रकृति से खाद्य पदार्थ लेने की चाहत में ये पत्तियां हाल ही में फिर से अपनी पैठ बना रही हैं.
उत्तरी कैरोलीना में गर्मियों के दिन से ठीक पहले बसंत ऋतु विदाई की तैयारी कर रही थी. अपने वयस्क जीवन में मैं पहली बार एक मुकम्मल बगीचा बनाने की तैयारी कर रहा था.
कम्पोस्ट डालने के लिए जब मैं निशान लगा रहा था तो मेरे बगल में मशीनी हल की आवाज़ सुनाई दी. लाल चिकनी मिट्टी को उलट-पुलट करती एक ओर रखकर छोटे कंकड़ों को बाहर फेंकने वाली यह मशीन अपना काम बख़ूबी करते हुए क्यारियां तैयार कर रही थी.
मशीन चलाने वाला व्यक्ति अपना काम समाप्त करने के बाद लंबी सांस भरते हुए बगल में आ खड़ा हुआ था.
मेरी ज़मीन की सीमा पर लगी बाड़ की ओर इशारा करते हुए उसने बड़ी बेपरवाही से कहा, "वहां काफ़ी पोक सलाद उगी हुई है."
मेरी नज़रों ने उसके इशारे का पीछा करते हुए मुआयना किया. जो मैंने देखा उसने मुझे अपने बचपन में धकेल दिया. पोक सलाद- ये दो शब्द मेरी यादों में मां और चाचियों को ले आया जो गांव-गिरांव से गुजरते हुए जब भी कभी पोकवीड या पोक सलाद नामक इन पौधों की हरियाली देखती थीं और रुक कर बड़ी सफाई से पौधे के तने से पत्तियां तोड़ लेती थीं.
यादों में रसोई से उठने वाली परदादी द्वारा पकाई जा रही उस व्यंजन की खुशबू भी तैर गई जो इन पत्तियों के साथ-साथ बेकन ग्रीज़ यानी सुअर की चर्बी को मिलाकर तैयार होता था.
समूचे अमरीका में प्रचुर मात्रा में उगने वाला यह जंगली हरा पौधा दक्षिणी न्यूयॉर्क राज्य से उत्तर पूर्वी मिसीसिपी तथा बाकी के दक्षिणी हिस्से में अप्पालेचियाई पहाड़ों के साथ-साथ उगता है. इन पत्तियों से बनने वाले हरे व्यंजन को पोक सैलेट के नाम से लोकप्रियता मिली है.
लूज़ियाना के टोनी जे व्हाइट के 1969 के हिट गाने पोक सलाद ऐनी से इसकी वर्तनी यानी स्पेलिंग पोक सलाद बन गई. 25 वर्ष पहले उत्तरी कैरोलीना के ठीक बीच में बसे एक ग्रामीण शहर (कम से कम जब तक मैं वहां रहता था तब तक का उसका रूप), सैनफोर्ड के अपने शांत घर से विदा लेने के बाद से मैंने ये दो शब्द सुने नहीं थे.
इस दौरान मेरा पिछला एक दशक पोलेरैडो में एक डिज़िटल यायावर के रूप में बीता था और पिछले आठ महीने की अल्पावधि मैंने मैक्सिको में बिताई थी.
मैं अभी-अभी उत्तरी कैरोलीना लौटा था. अपने पास अपनी ज़मीन थी तो मैं अपना भोजन खुद उगाने का निश्चय कर चुका था. बाढ़ के पास लगे इन पत्तेदार पौधों को देखकर अचानक ख्याल आया : क्या लोग अब भी पोक सैलेट खाते हैं?
संक्षेप में कहें तो उत्तर हां और ना दोनों ही है. दक्षिण में रहने वाले पुराने वाशिंदों से यदि आप पूछें तो बहुत सारे लोगों को पोक सैलेट खाने की याद अब भी है, या वो ऐसे किसी को जानते हैं जो इसे खाता था.
लेकिन यदि युवा पीढ़ी की बात करें तो दर्जनों लोगों से पूछने के बाद भी 40 से कम उम्र का मुझे एक भी व्यक्ति ऐसा नहीं मिला जो इसका नाम भी जानता हो.
अमरीकियों की प्लेट से यह क्यों गायब हो गया और अब यह भोजन में फिर से अपना स्थान कैसे बना रहा है यह समझने के लिए हमने इस पौधे के इतिहास पर नज़र डालनी होगी.
अप्पालेचिया में पोकवीड कई पीढ़ियों तक लोगों का मुख्य भोजन रहा था. पश्चिमी वर्जीनिया के लॉस्ट क्रीक फार्म में शैफ और किसान माइक कोस्टेलो बताते हैं, "यह एक ऐसा पदार्थ था जो आप तब तक खाते थे जब आप गरीब थे. अब ऐसी बात नहीं रही." जंगली पौधों को ढूंढकर उनका व्यंजन बनाना लोगों की बढ़ती सुदृढ़ आर्थिक स्थित के साथ ही कम होता चला गया.
कोस्टेलो का कहना है, "पोक सैलेट जैसे व्यंजनों से सम्बद्ध बातें अधिकांशतः शर्म, गरीबी या हताशा भरी हैं, लेकिन मेरे लिए तो कुल मिलाकर मामला बुद्धिमानी और संसाधनों के प्रयोग का है. और इन बातों पर लोग गर्व कर सकते हैं."
यदि आप दक्षिण पूर्वी अमरीका में रहते हैं तो कुदरती तौर पर आपने पर्याप्त मात्रा में इस पौधे को उगते हुए देखा हो सकता है लेकिन ज़रूरी नहीं कि आप इसका नाम जानते हों. साल भर उगने वाला यह सख्तजान पौधा 10 फीट ऊंचा हो सकता है और लगभग कहीं भी फल-फूल सकता है.
एक बार पूर्णावस्था प्राप्त करने पर इसके पत्ते काफी निखरकर और बैंगनी रंग में दिखाई देते हैं जिन पर गहरे बैंगनी या काले फल लगे हो सकते हैं.
प्रकृति से चुने जाने वाले अन्य खाद्य पदार्थों की तरह पोकवीड के साथ भी एक समस्या है : यदि इसे ढंग से न तैयार किया जाए तो यह ज़हरीला हो सकता है.
केन्टकी के हार्लान में वार्षिक पोक सैलेट फेस्टिबल की मेज़बानी करने वाले सिटी ऑफ हार्लान टूरिस्ट एंड कन्वेंशन कमीशन के कार्यकारी निदेशक ब्रेंडन पेनिंगटन कहते हैं, "वर्षों पहले अप्पालेचिया में कुदरत पर आश्रित रहना बहुत अहम था और हमारे बहुत सारे बुजुर्ग अब भी यह जानते हैं कि आप कुदरत से लेकर क्या खा सकते हैं और क्या नहीं. लेकिन बड़े पैमाने पर होने वाली कृषि और उपलब्ध भोजन के चलते वह कला अब कहीं खो गई है."
पोक पौधे के फलों को स्याही से लेकर लिपिस्टिक तक लगभग सभी चीजों के लिए प्रयोग किया जाता रहा है (लिपिस्टिक के बारे में डॉली पार्टन ने अपनी प्रेरणादायी पुस्तक ड्रीम मोर : सेलिब्रेट द ड्रीमर इन यू में भी जिक्र किया है), लेकिन इन्हें कभी खाना नहीं है- न तो जड़ों को, न तने को, न बीज को और न ही कच्ची पत्तियों को.
हालांकि, आधुनिक युग में पोक सैलेट खाने से किसी की मृत्यु हुई हो, ऐसा मामला तो सामने नहीं आया है लेकिन इस पौधे के विभिन्न हिस्से ज़हरीले होते हैं और अक्सर इनके फल खाने से बच्चों को बीमार पड़ते देखा गया है.
जंगली अंगूर की तरह दिखने वाले इन फलों को खाने से भीषण पेट दर्द, बढ़ी हुई हृदयगति, उल्टी, दस्त तथा सांस लेने में दिक्कत भी हो सकती है.
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